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क्या हिन्दू एक भगवान में मानते है, ब्रह्म परमात्मा और भगवान कौन है?

ब्रम्ह, परमात्मा और भगवान
वेद में वेदांत में और कई पुस्तको में ब्रह्म, परमात्मा, भगवान् शब्द प्रयोग होता है, उदाहरण है  भागवत१.२.११। प्रश्न ये उत्पन्न होता है कि ये तीन लोग है अथवा ये तीनो एक है। हिन्दू धर्म में ३३ कोटि देवी-देवता है। तो किसकी पूजा करें किसकी ना करें। कई प्रश्न है जिसका उत्तर मिलना आवश्यक है। क्योंकि कई लोग ये मानते है की हिन्दू धर्म में एक भगवान(गोंड) को नहीं मानते है। और अब तो यहां ब्रह्म, परमात्मा, भगवान् भी आ गए है।
ये प्रश्न तो गलत है कि हिन्दू एक भगवान में नहीं मानते। एक ही भगवन होते है। ब्रह्म, परमात्मा, भगवान ये एक ही है लेकिन इनके शक्तिओं में भेद होता है। जैसे पानी होता है, बर्फ होता है और भाप होता है। ये तीनो एक ही है इनके सरूप में अन्तर होता है। किसी मरीज को भाप दिजाती है, किसी को बर्फ़ और किसी को पानी लेकिन है तीनो एक। वैसे ही, ब्रह्म के उपासक को ज्ञानी कहते है, परमात्मा के उपासक को योगी कहते है, और भगवन के उपासक को भक्त कहते है।
ठीक तो इनके शक्तिओ में क्या भेद है? कौन बडा है? ब्रह्म, परमात्मा, भगवान में सब बराबर है। जैसे H2o भाप, पानी और बर्फ में होता है , वैसे ही ब्रह्म, परमात्मा, भगवान में सभी शक्तियॉ है। लेकिन वो प्रकट नहीं करते। तो अब समझते है की क्या अंतर है।


ब्रह्म:- ब्रह्म में केवल दो शक्ति होती है। वो सबसे बड़ा होता है, और आपने सत्ता की रखवाली करना। लेकिन उसमें सारी शक्तियॉ होती है लेकिन सिर्फ ये दो प्रकट होती है। जैसे माचीस की तीली, उस तीली में आग है लेकिन प्रकट नहीं होती है। वैसे ही ब्रह्म में सब शक्ति है लेकिन प्रकट नहीं होती। ब्रह्म अर्थात निर्गुण निविशेष निराकार।
परमात्मा:- परमात्मा सर्गुण सविशेष साकार होता है। लेकिन उनका लीला और पर्रिकर नहीं होता। अर्थात भगवन विष्णु।
भगवान:- में सभी शक्तियॉ प्रकट होती है। अर्थात भगवान श्री राम श्याम, के लिए ब्रह्म, परमात्मा भगवान तीनो शब्दो का उपयोग होता क्योंकि इनमे ये तीनो शक्तियॉ प्रकट होती है। इनके लीला और पर्रिकर भी होता है। जैसे राम श्याम यह लीला, और गोलोक, मथुरा पर्रिकर।
जैसे एक पीएचडी अध्यापक विश्वविद्यालय में पढ़ता है और वही अध्यापक अपने २ साल के बच्चे को क ख ग पढ़ता है। तो क्या ये दो व्यक्ति हैं। नहीं! एक ही है, जब  जितनी बुद्धि की आवश्यकता पढ़ी उतनी उसने लगाया। वैसे ही यह ब्रह्म, परमात्मा, भगवान एक ही है, जब जितनी शक्तिओ की आवश्यकता होती है उतनी प्रकट करते है। क्योंकि भगवान को इन तीनों स्वरूप में रहते है इसलिए ब्रह्म, परमात्मा, भगवान को भगवान का स्वरूप कहते हैं।
तो हिन्दू एक भगवान में मानते है। तो भगवान एक भी है (वेद कहता है), दो भी है (गीता कहती है, और वेद कहता है बृहदारण्यकोपनिषद् २.३. १) और तीन भी है (फिर वेद कहता है)। अरे वो एक है! उसके तीन स्वरूप होते है। ये वेद गीता भी यही कहते हैं की भगवान एक ही हैं। उनके अनेक स्वरूप होते हैं। इसलिए वेद गीता कहते हैं, भगवान २ हैं, ३ हैं। जैसे एक वक्ती, भाई, पति, पिता, बेटा हैं। तो वो व्यक्ति तीन नहीं हो गया। उस वक्ती के ये तीन स्वरूप हैं।
❛देवी-देवता और भगवान में क्या अंतर है?❜ और ❛भगवान के सभी अवतार एक ही है, कैसे?❜

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