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क्या राम और कृष्ण एक ही हैं?

राम कृष्ण एक हैं
भगवान के अवतारों में भेद-भाव करना ये ❛नामापराध❜ हैं। और ❛नामापराध❜ से बड़ा कोई पाप नहीं हुआ करता। भगवान के जितने भी अवतार है उनमे भेद-भाव करना अपराध हैं। भगवान के किसी भी अवतार में भेद बुद्धि नहीं लगनी चाहिए और खास तोर से राम-कृष्ण अवतार में। और सभी अवतार में तो शरीर का अंतर हैं, देखने मे! जैसे नरसिंह अवतार, वराह अवतार, मत्स्य अवतार।
लेकिन! राम कृष्ण में तो शरीर में भी भेद नहीं हैं। अध्यात्म रामायण में ब्रह्मा ने कहा था "मायातीतं माधवमाद्यं जगदािदं" हे राम तुम माया तित(माया से परे), मायाधीश हो और तुम माधव हो। ब्रह्मा माधव कह रहे है। अरे ब्रह्मा जी! आप की बुद्धि ख़राब है क्या? ब्रह्मा जी ये तो राघव है, माधव तो द्वापर में अवतार लेके आये थे। फिर ब्रह्मा बोले अध्यात्म रामायण "वन्दे रामं मरकतवर्णं" हे राम, मै आपको प्रणाम करता हूँ, जो मरकतवर्णं के आप हैं। मरकतवर्णं अर्थः मथुरा के धीश। अब सोचों मथुरा से क्या मतलब है राम का? राम तो मथुरा गये ही नहीं, रामाअवतार में। और ये भी सुनो अध्यात्म रामायण "वृन्दारण्ये वन्दितवृन्दारकवृन्दं" वृंदावन में रहने वाले मेरे राम। ध्यान दो, ये सब वाक्य ब्रह्मा है।
इसके अलावा श्रीराम ने स्वयं ही कहा है, जब दंडकारण्य के परमहंस राम को देख कर मगन हो गए और माधुर्य(प्रियतम) भाव की इच्छा प्रकट की। तो राम ने वरदान दिया था की मैं तुम्हारा प्रियतम बन जाउगा। लेकिन मैं इस अवतार में मर्यादा में रहना चाहता हूँ, तो तुम लोग गोपी बन कर अगले अवतार में आना। ये पद्म पुराण में कथा हैं। तो इतना स्पष्ट बोल रहे है राम। राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न यही चारो फिर से कृष्णाअवतार में आये और राम कृष्णा बन गए, लक्ष्मण बलराम बन गए , भरत प्रद्युम्न बन गए, शत्रुघ्न अनिरुद्ध बन गए। ब्रह्मा वैवर्त पुराण:- श्री कृष्ण ने राधा से कहा "याद है! तुम सीता बनी थी, तुमारा अपहरण किया रावण ने।"

राम और श्री कृष्ण के नाम में भी भेद नहीं हैं। राम माने क्या? जिसमे योगी लोग रमण(तन-मन को आनंदित करने का उपक्रम) करे। तो कृष्ण में भी योगी लोग रमण करते हैं। कृष्ण माने क्या? जो परमहंस को अपनी और खींच ले और वही तो राम भी करते है। अगर गुण के बारे में सोचे तो उसमे भी भेद नहीं हैं। शरीर में भी भेद नहीं हैं। केवल में मुकुट भेद है। लिकेन कोई मुकुट दिन भर तो नहीं पहना, अरे नहाते सोते खाते तो नहीं पहनते। मुकुट उत्तर दो, अब पहचानो की कौन राम है और कौन श्याम। रंग भी दोनों का एक है, पीताम्बर दोनों पहनते हैं, सारे श्रृंगार दोनों के एक हैं।
राम श्याम के मुकुट उत्तर दो और दोनों के भक्त को बुलाओ और पूछो कौन राम है और कौन स्याम। राम और कृष्ण में, न दोनों में शरीर में अंतर, न नाम में अंतर, न गुण में अंतर, न लीला में। थोड़ा सा अंतर लीला में एक भाव का। वात्सल्य भाव का रास(प्रेम) राम दे रहे है, और माधुर्य भाव के लिए उन्होंने अगले अवतार का वादा कर दिया। उसमे दे दिया राम ने। और कोई प्रतिज्ञा करदेता रामाअवतार में की हमें तो माधुर्य भाव का रास देदो। तो वो दे देते, लेकिन अकेले में किसी को न पता चले, बस!
एक बार सूरदास ने तुलसीदास से कहा, "हमारे कृष्ण तो १६ कलाओं के अवतार है, और आप के राम १२ कलाओं के अवतार है, आप भी कृष्ण भक्ति करो" आप लोग ये न सोचे की महात्माओं में लड़ाई हो रही हैं। महात्माओं लोग जो बोलते हैं, वो विनोद में बोलते हैं। तो जबाब क्या दिया तुलसीदास जी ने "हम तो समझ रहे थे राजकुमार है खाली, और आप बता रहे है १२ काल के अवतार है मेरे राम, इस बात से मेरी भक्ति और बढ़ गई।"
ये सब महात्मा लोग विनोद में बोलते है, और हम सब लोग इसमें भेद बुद्धि लगा देते है। ये नहीं करना चाहिए। हाँ! यह बात सही है की, हमारा मन तमाम जन्मो के संस्कार से युक्त होता हैं और हमारा मन जिस अवतार में जिस लीला में, नाम में , गुण में, आकृष्ट(आसक्त) होता हैं, हमें वो नाम, गुण, लीला ज्यादा पसांद आती हैं। तो हमें उस नाम का, गुण का, लीला का गान करना चाहिए, लेकिन साथ-साथ ये भी समझे रहना चाहिए की ये सब एक ही है। अवश्य पढ़े ❛भगवान के सभी अवतार एक ही है, कैसे?❜

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