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मन्त्र संहिता

मन्त्र संहिता
संहिता वेद का ही एक अंश है। संहिता हिन्दू धर्म के पवित्रतम और सर्वोच्च धर्मग्रन्थ वेदों का मन्त्र वाला खण्ड है। ये वैदिक वांग्मय का पहला हिस्सा है जिसमें काव्य रूप में देवताओं की यज्ञ के लिये स्तुति की गयी है। इनकी भाषा वैदिक संस्कृत है। चार वेद होने की वजह से चार संहिताएँ हैं (हर संहिता की अपनी अलग अलग शाखा है):-
ऋग्वेद संहिता
सामवेद संहिता
यजुर्वेद संहिता (शुक्ल और कृष्ण)
अथर्ववेद संहिता
संहिता अर्थात 'सम्यक' अथवा पूर्वापर रूप में संग्रहीत साहित्यिक अथवा आचार-नियम सम्बन्धी सामग्री। इसीलिए संग्रहीत और सुसम्पादित वैदिक साहित्य को 'संहिता' कहा जाता है।

संहिता का अर्थ

संहिता (संस्कृत: संहिता, सहिहत) का शाब्दिक अर्थ है "एक साथ रखो, जुड़ा हुआ है, संघ" और "एक पद्धति, पाठ या छंद के नियम-आधारित संयोजन"। संहिता भी वेदों में पाठ की सबसे प्राचीन परत को संदर्भित करती है जिसमें मंत्र, भजन, प्रार्थना, उपनिवेशक और बड़बड़ी शामिल हैं। संहिता जड़ों से एक संस्कृत शब्द है, सैम (सं) और हिता (हित), जिसका अर्थ है "सही, उचित" और "स्वस्थ, व्यवस्थित" क्रमशः। संयोजन शब्द का अर्थ है "जुड़ाव, सम्मिलित हो गया, लिखें, व्यवस्था, एक साथ मिलकर, संघ" और "युफोनिक नियमों के अनुसार पत्रों का संयोजन, ग्रंथों या छंदों के किसी भी तरीके से व्यवस्थित संग्रह"

गायत्री मंत्र ऋग्वेद ४.६२.१० का मंत है

गायत्री मंत्र प्रसिद्ध हिंदू मंत्रों में से एक है। यह ऋग वेद संहिता में है।
ॐ भूर्भुवस्वः। तत्सवितुर्वरेण्यम्। भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात्
Oṁ Bhūr Bhuva~Swah', Tat savitur varenyam, Bhargo devasya dhīmahi, Dhiyo yo nah prachodayāt
Let us meditate on that excellent glory of the divine Light (Sun). May he inspire our thoughts, stimulate our understandings.
सृष्टिकर्ता प्रकाशमान परामात्मा के तेज का हम ध्यान करते हैं, वह परमात्मा का तेज हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर चलने के लिए प्रेरित करें।

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