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धनतेरस क्यों मनाया जाता है व धनतेरस मनाने का कारण?

धनत्रयोदशी

धनतेरस पर्व की कथा व कारण?

धनत्रयोदशी समुद्र मंथन के समय हाथों में अमृत कलश लिए भगवान विष्णु ही धन्वन्तरि रूप में प्रगट हुए। अतएव भगवान विष्णु के ❛धन्वन्तरि❜ रूप में प्रगट होने पर यह धनतेरस का पावन दिवस मनाया जाता है। भगवान् धन्वन्तरि आयुर्वेद के जनक और वैद्य के रूप में भी जाने जाते हैं। यहाँ पर एक बात ध्यान रहे, आयुर्वेद के जनक का मतलब यह नहीं की धन्वन्तरि जी ने आयुर्वेद के नियम बनाया, ऐसा नहीं है। भगवान् धन्वन्तरि जी नेआयुर्वेद को प्रकट किया। जैसे हम आपको वेदों शास्त्रों के सिद्धांत को आपके समक्ष प्रकट करते हैं। उन वेदों के सिद्धांत को हम बनाते नहीं हैं। वैसे ही भगवान् धन्वन्तरि जी ने आयुर्वेद को प्रकट किया। आयुर्वेद वेद का ही अंश (भाग) है। अर्थात आयुर्वेद उपवेद हैं। वेद के बारे में अधिक जानने के लिए पढ़े ❛वेद❜
कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन समुद्र मंथन से भगवान धन्वन्तरि का जन्म हुआ था। जन्म शब्द बनता है जनि धातु से, और जनि का अर्थ है प्रादुर्भाव। प्रादुर्भाव माने प्रकट होना या दोबारा नये सिरे से अस्तित्व में आना। अधिक जानने के लिए पढ़े ❛जन्म का मतलब? क्या श्री कृष्ण, श्री राम का जन्म हुआ था?❜ तो क्योंकि समुद्र मंथन से भगवान धन्वन्तरि का जन्म हुआ अर्थात प्रगट हुए थे, इसलिए इस तिथि को धनतेरस या धनत्रयोदशी के नाम से जाना जाता है। भारत सरकार ने धनतेरस को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है।

प्रथा

❛धन्वन्तरि❜ जब प्रकट हुए थे तो उनके हाथो में अमृत से भरा कलश था। भगवान धन्वन्तरि चूंकि कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए ही इस अवसर पर बर्तन खरीदने की परम्परा है। परन्तु यह प्रथा हमें नहीं मनानी चाहिए, क्योंकि इस प्रथा का कोई मतलब नहीं निकलता। चूंकि भगवान धन्वन्तरि कलश लेकर प्रकट इसलिए हम भी बर्तन लेकर प्रकट हो ये बात कुछ जमी नहीं। इसलिए यह प्रथा को त्याग दीजिये।
इसके अलावा कई और प्रथा भी जुड़ गयी है, उनका कोई न कोई कारण हो सकता हैं। परन्तु हमें धनतेरस मना रहे है इसलिए हमें धनतेरस से संबंधित चीजों का कारण जानना होगा।

धनतेरस मनाने का उद्देश्य?

धनतेरस के दिन आयुर्वेद के सिद्धांत को समझना और अपने दैनिक जीवन में उनको ढालना धनतेरस मनाने का उद्देश्य हैं। अपने आपको स्वस्थ क्यों रखें? यह एक प्रश्न हो सकता है? तो अपने आपको स्वस्थ इसलिए रखें जिससे हम भगवान की भक्ति रूप ध्यान करते हुए सही-सही कर सके। अगर हम अपने शरीर को स्वस्थ नहीं रखेंगे, तो कहीं यहाँ दर्द तो कहीं वहाँ दर्द रहेगा। तो भगवान का रूप ध्यान करने की बजाए हम अपने शरीर के अंगो का ध्यान करने लगेंगे। अतएव अपने आपको स्वस्थ रखें जिससे भगवान की भक्ति कर सके यही धनतेरस मनाने का उद्देश्य हैं।
हमारा सबसे बड़ा धन तो श्री कृष्ण श्री राम ही हैं। वो धन है तो हम वास्तविक धनवान हैं। कृष्ण रामरुपी धन के बिना दरिद्रता (दुःख) कभी ख़तम नहीं हो सकती।

VedicAim का मत, वेदों के सिधान्तो पर आधारित।

धन- ते- रस हो सकता है कुछ लोगों को ऐसा लगता हो। पर हम तो ऐसा सोचते हैं, धन (कृष्ण) - ते (उनका)- रस (प्रेम)। अर्थात कृष्ण राम रुपी धन का प्रेम रस या भक्ति रस।

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