भक्ति में तीन ज्ञान भक्त को जानना आवश्यक है।

कृष्ण, कृष्णभक्ति, प्रेम,तिन महाधन।
वेद शास्त्र कहे संबंध अभिधेय प्रयोजन।
कृष्ण, कृष्ण भक्ति, प्रेम, तिन महाधन।।
-गौरांग महाप्रभु
ज्ञान सबसे पहले भक्त को आवश्यक है। गौरांग महाप्रभु जी ने कहा "वेद शास्त्र कहे संबंध अभिधेय प्रयोजन।" यह तीन का ज्ञान भक्त को आवश्यक है। १. संबंध २. अभिधेय और ३. प्रयोजन। तो संबंध अभिधेय प्रयोजन क्या है? इनका उत्तर गौरांग महाप्रभु जी ने एक लाइन में दिया। "कृष्ण, कृष्ण भक्ति, प्रेम, तिन महाधन।"

१. संबंध

सम्बन्ध कृष्ण (भगवान) से हमारा क्या है। ये ज्ञान सबसे पहले आवश्यक। भगवान हमारे सब कुछ है, अंशी है, हमारे स्वामी हैं, हमारे सखा है, वो ही हमारे है, वो ही। "त्वमेव सर्वं मम देव देव॥" तुम ही सब कुछ हो मेरे। यह संबंध ज्ञान आवश्यक है।

२. अभिधेय

अभिधेय अर्थात भगवान से कैसे मिला जाएगा। यह ज्ञान संबंध ज्ञान से भी अधिक आवश्यक है। नहीं तो हमारे भारत में क्या हो रहा है? चारों धाम के चक्कर लगा रहे है लोग भगवान से मिलने के लिए, एक आदमी जप कर रहा है "सीता राम सीता राम, राधे श्याम राधे श्याम" एक आदमी पाठ कर रहा है "गीता, भागवत रामायण, सुन्दर कांड" ये अक्षरों को पढ़ रहे है। एक आदमी पूजा कर रहा है हाथ से "अक्षत, चन्दन, ये मंत्र बोलें, जल्दी-जल्दी" ५० बार ब्रज की परिक्रमा किया, १०० बार अयोध्या की परिक्रमा किया। और मन संसार में रखा। रसगुल्ला खाएं गए। और परिक्रमा करते गए, इससे कुछ नहीं होना है। ये सब फालतू का नाटक है, इससे कुछ नहीं होना है, ये तो शारीरिक कर्म है। भगवान तो मन का प्रेम (कर्म) देखते है। भगवान के यहाँ मन का कर्म लिखा जाता है। तन का कर्म नहीं लिखा जाता।
ये सब लोग जो करते है उनसे पुछो, "मन से आँसू बहाया भगवान के लिए कभी कि भगवान आप क्यों नहीं मिल रहे है।" नहीं वो तो नहीं किया। तो फिर क्या किया, घास खोदा। ये उपासना (भक्ति) नहीं है। तो जब तक सही-सही अभिधेय का ज्ञान नहीं होगा तो कुछ नहीं लाभ होगा। वो व्यक्ति भक्ति कैसे करेगा। गलत भक्ति वो व्यक्ति करेगा। और गलत भक्ति का फल कुछ नहीं मिलेगा और जीवन समाप्त हो जायेगा। तो सही-सही अभिधेय का ज्ञान आवश्यक है। अभिधेय का ज्ञान है, कृष्ण (भगवान) की भक्ति मन से।

३. प्रयोजन

प्रयोजन भी सही-सही पता हो। प्रयोजन मतलब लक्ष्य (उद्देश्य)। अगर सही सही प्रयोजन नहीं पता होगा तो भगवान से संसार का सामान मांगेंगे। हमारे भारत में लोग जा रहे है वैष्णो देवी मंदिर, तिरुपति मंदिर, बालाजी मंदिर। क्या करते है लोग वहाँ जाकर? भगवान से संसार मांगते है "हमें बेटा हो जाये, हम धनवान हो जाये, हमारी मूवी हिट हो जाये" ये कामना ले-ले कर सब घूम रहे है।
तो प्रयोजन ज्ञान है, "दिव्य प्रेम मिले और उस प्रेम से श्याम सुन्दर की सेवा करेंगे, उनका सुख चाहेंगे" तो ये सब ज्ञान किसी सिद्ध महापुरुष (गुरु) के द्वारा प्राप्त करना जरूरी है। इस ज्ञान के बिना सही-सही भक्ति नहीं हो सकती।

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