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सबसे बड़े भगवान कौन है, राम कृष्ण शंकर या विष्णु?

सबसे बड़े भगवान?
हमने आपको इस लेख में प्रमाणों के द्वारा बताया कि राम और कृष्ण एक ही हैं और यह वाक्य ब्रह्मा के हैं कि "राम और कृष्ण एक हैं।" ब्रह्मा से बड़ा बुद्धिमान कौन होगा। अस्तु, राम और कृष्ण एक है यह बात हमने आपको बताया। फिर हमने अपने दूसरे लेख में यह बताया कि कैसे भगवान के सभी अवतार एक हैं इस लेख का सारांश यह है कि ब्रह्मा शंकर विष्णु सीता राधा लक्ष्मी सरस्वती यह सब एक है और लीला में भगवान अपने आपको दो तीन चार पांच रूप में बनाए हुए हैं। लेकिन वास्तव में यह लोग एक हैं। फिर हमने आपको बताया कि क्या हिन्दू एक भगवान में मानते हैं इस लेख में हमने आप को बताया कि ब्रह्म परमात्मा और भगवान यह ३ शब्दों का वेदों शास्त्रों पुराणों में प्रयोग किया जाता है और यह तीनों एक ही है। यह सभी लेखों का सारांश यह है कि भगवान के सभी अवतार एक ही हैं और उनमे कोई भी अंतर हैं।
अतः इनमें भेद बुद्धि नहीं लाना चाहिए कि यह भगवान बड़े हैं और यह भगवान छोटे हैं। यह बात हमें नहीं सोचना चाहिए। क्यों? इसलिए क्योंकि नारद जी ने कहा नारद भक्ति सूत्र ४१ "भक्त और भगवान में अंतर नहीं हुआ करता।" तो जब भक्त और भगवान में अंतर नहीं हुआ करता। तो फिर भगवान के ही अवतार में अंतर कैसे हो सकता है? इसलिए भगवान के सभी अवतार एक ही हैं और उनमें कभी भी भेद की बात मत सोचिएगा कि यह भगवान बड़े हैं और यह भगवान सोचे छोटे हैं, यह बात मत सोचिएगा।
जैसे एक शिक्षक पीएचडी किया हुआ है। जब अपने कॉलेज में पढ़ता है तो वहाँ पर वह अपनी बहुत बुद्धि लगा कर उनको समझाता है। लेकिन जब वही शिक्षक अपने बच्चे को एबीसीडी सिखाता है क ख ग घ सिखाता है। और अगर वही पर कोई उसको देखे तो क्या कहेंगे "ये पीएचडी क्या हुआ शिक्षक नहीं है यह तो क ख ग सिखाता है इससे ज्यादा इसको कुछ मालूम ही नहीं है" परंतु वास्तविकता क्या है? क ख ग घ जब सिखाता है तब भी उसे सारा ज्ञान मालूम रहता है और जब वह कॉलेज में पढ़ता है तब भी उसको सारा ज्ञान मालूम रहता है।
तो जब शिक्षक को जहाँ जितनी ज्ञान की आवश्यकता होती है उतनी ज्ञान वह प्रकट करता है। अगर कोई १२वीं कक्षा का बच्चा रहेगा तो उतना ज्ञान प्रकट करेगा। और अगर कोई ५वी कक्षा का बच्चा रहेगा तो उतना ज्ञान प्रकट करेगा। वह शिक्षक के पास सारा ज्ञान है, लेकिन जब शिक्षक को जहाँ जितनी ज्ञान की आवश्यकता होती है उतनी ज्ञान वह प्रकट करता है।
कुछ इसी प्रकार भगवान के समस्त अवतार हैं। भगवान को जहाँ जितनी शक्ति, ज्ञान आदि की जरूरत होती है। उतनी ही शक्ति, ज्ञान आदि को प्रकट करते हैं और उतना ही कार्य करते हैं। जैसे श्री राम अवतार में भगवान को कम शक्ति की जरूरत पड़ी तो उन्होंने कम शक्ति प्रकट किया और जब कृष्णावतार हुआ तो उसमें अधिक शक्तियों की आवश्यकता पड़ी तो अधिक शक्ति प्रकट किया। रामजी १२ कलाओ के अवतार है और कृष्ण १६ कलाओं के अवतार हैं। यह बात सत्य है। लेकिन वास्तविकता क्या है? राम जी में १६ कलाएं है लेकिन प्रकट नहीं किया, कृष्ण जी के अवतार के समय प्रकट कर दिया। तो राम जी में भी १६ कलाएं हैं और कृष्ण जी में भी १६ कलाएं हैं इनमे भेद नहीं है। किसी भी भगवान के अवतार में चाहे वह ब्रह्मा वो चाहे वह विष्णु हमने आपको इस लेख में बताया था कि भगवान के समस्त अवतार एक ही है अतएव इसमें भेद बुद्धि मतलब लाये।

जो व्यक्ति भगवान के अवतार में छोटा बड़ा मानते हैं वह नामापराध कर रहे हैं।

नामापराध से बड़ा कोई और अपराध नहीं हुआ करता। सबसे बड़ा अपराध है नामापराध। नामापराध का केवल यही प्रायश्चित है कि जिस संत या भगवान के प्रति आपने नामापराध किया है, उससे आप जाकर क्षमा मांगे और अगर उन्होंने क्षमा कर दिया तो आप उस अपराध से मुक्त हो जाएंगे नहीं तो आपने नामापराध किया है यह माना जाएगा। इसलिए भगवान के अवतार में छोटा बड़ा अपना न माने। चाहे विष्णु शंकर ब्रह्मा, राम कृष्ण, सीता राधा, हो चाहे कोई हो भगवान के अवतार सब एक ही है। जब नारद जी ने यहाँ तक कह दिया कि भक्त और भगवान में अंतर नहीं होता तो भगवान के अवतार और तो भगवान के समस्त अवतारों में अंतर कैसे हो सकता है। इसलिए आप ऐसा कभी ना सोचिए कि भगवान का कोई अवतार छोटा है या कोई अवतार बड़ा है।

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