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श्री राधा जी का जन्म कैसे हुआ? - ब्रह्म वैवर्त पुराण अनुसार

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श्री राधा जी के जन्म की कथा ब्रह्म वैवर्त पुराण में मिलती है। ब्रह्म वैवर्त पुराण अनुसार श्री राधा जी का जन्म (प्रादुर्भाव) प्रथम बार गोलोक में और द्वितीय बार व्रज में वृषभानु जी के घर में हुआ। यह ध्यान रहे की जन्म का अर्थ प्रादुर्भाव होता है अर्थात् प्रकट होना। हम (आत्मा) माँ के पेट में एक शरीर प्रकट होते है। और भगवान जो अदृश्य रूप में है वो अपने को दृश्य रूप में प्रकट करलेते है। श्री राधा जी का जन्म गोलोक में कैसे हुआ? शौनक उवाच
अतः परं किं चकार भगवान्सात्वतांपतिः।
एतान्सृष्ट्वा किं चकार तन्मे व्याख्यातुमर्हसि ॥१७॥
- ब्रह्मवैवर्त पुराण खण्ड १ (ब्रह्मखण्ड) अध्याय ०५ संक्षिप्त भावार्थ:- शौनक जी ने सौति जी से पूछा - सूतनन्दन! अब यह बताइये कि गोलोक में सर्वव्यापी महान परमात्मा गोलोक नाथ ने इस नारायण आदि की सृष्टि करके फिर क्या किया है? इस विषय का विस्तारपूर्वक वर्णन करने की कृपा करें। सौतिरुवाच
अतः परं तु गोलोके गोलोकेशो महान्प्रभुः।
एतान्सृष्ट्वा जगामासौ सुरम्यं रासमण्डलम्॥
...
तत्र गत्वा च तैः सार्धं समुवास जगत्पतिः।
दृष्ट्वा रासं विस्मितास्ते बभूवुर्मुनिसत्तम ॥ २४ ॥
- ब्रह्मवैवर्त पुर…

जगन्नाथ मंदिर में रखा है भगवान कृष्ण का दिल? - महाभारत और भागवत पुराण अनुसार

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श्री जगन्नाथ पुरी के मंदिर में आज भी एक मूर्ति में सुरक्षित है श्रीकृष्ण का दिल! ऐसे बहुत से लेख आज-कल लोग प्रकाशिक कर रहे है। और कुछ लोगों ने तो श्रीकृष्ण के दिल की तुलना Marvel Cinematic Universe के Iron Man के Arc Reactor से कर दी। आश्रय तो यह है की बहुत से लोग इस पर विश्वास करते है। बिना यह जाने की श्री कृष्ण की …

गीता को गीता क्यों कहते है?

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गीता का अर्थ क्या है? इसे कुछ लोग गीतोपनिषद् क्यों कहते है? क्या गीतोपनिषद् कहना सही है? श्रीमद्भगवद्गीता को गीता क्यों कहते है? प्रश्न थोड़े अजीब है, लेकिन कई लोग इन प्रश्नों का उत्तर जानना चाहते है। इसलिए हम इन प्रश्नों पर एक-एक करके पर विस्तार से चर्चा करेंगे। गीता का शाब्दिक अर्थ क्या है? गीता शब्द का कोई अर्थ नह…

श्रीमद्भगवद्गीता - क्यों, क्या, किसने, महत्त्व?

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गीता क्यों कहा गया? क्या अर्जुन वाकई में अज्ञानी था? गीता किसने लिखी? गीता का महत्व? गीता में कितने अध्याय है? क्या गीता को पढ़ने से मन में संन्यास की भावना होती है? इत्यादि कई प्रश्न है जिन्हें जानना आवश्यक है। इस लेख में हम श्रीमद्भगवद्गीता के विषय में जानेंगे, उसके माहात्म्य के विषय में जानेंगे। क्यों गीता कही गयी? …

गीता स्मृति है या श्रुति? - ब्रह्मसूत्र, शंकराचार्य अनुसार

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श्रीमद्भगवद्गीता जिसे स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन से कहा था, उसके बारे में समाज के कुछ वर्गों में मतभेद हैं। क्या है वह मतभेद? वो यह है कि गीता श्रुति है या स्मृति? गीता के विषय में कुल तीन प्रकार की बातें कहीं जाती हैं - १. गीता श्रुति है २. गीता स्मृति है ३. गीता श्रुति और स्मृति दोनों है। अतः इनमें से कौन सा …

नारद भक्ति सूत्र | प्रेम सूत्र

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वेदों में तीन काण्ड है - कर्म, ज्ञान और भक्ति। इन तीनों की मीमांसा (विवेचना या विचार-विमर्श) के लिए तीन प्रकार के दर्शन शास्त्र हैं। जैसे, कर्म और ज्ञान के अपने-अपने दर्शन-शास्त्र है। वैसे ही, भक्ति का भी दर्शन-शास्त्र है। भक्ति के विषय में तीन दर्शन-शास्त्र बहुत प्रचलित है - १. नारद भक्ति दर्शन, २. शाण्डिल्य भक्ति दर्शन और ३.…

रामलला कैसे दिखते है? बाल्यावस्था में श्री राम कैसे थे?

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श्री राम का बाल रूप कैसा है? वो कैसे दीखते है? आप इस लेख में इस विषय के बारे में प्रमाण द्वारा जानेंगे। जैसा की आपने कई कविताओं को पढ़ा होगा, जिनमें श्री कृष्ण के बचपन और रूप की बहुत प्रशंसा की है; और हो भी क्यों न, श्री कृष्ण है ही नटखट। लेकिन श्री राम के विषय में ऐसा नहीं है; क्योंकि वे मर्यादा पुरुषोत्तम है। मर्यादा में नटखट…

ब्रह्मसूत्र | वेदान्त सूत्र

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ब्रह्मसूत्र, भारतीय दर्शन के छः दर्शनों में से एक है। इसे वेदान्त सूत्र, उत्तर-मीमांसा सूत्र, शारीरिक सूत्र या शारीरिक भाष्य और वेदान्त दर्शन आदि के नाम से भी जाने जाते है। इस पर अनेक भाष्य भी लिखे गये हैं। इसके रचयिता बादरायण है, जो वेदव्यास के नाम से भी जाने जाते है। महर्षि वेदव्यासरचित ब्रह्मसूत्र बड़ा ही महत्वपूर्ण ग्रंथ है…

सनातन धर्म में तीन काण्ड

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सनातन धर्म (हिंदू धर्म या वैदिक धर्म) के धार्मिक ग्रंथ वेदों में, तीन मार्ग बताए गए हैं। मनुष्य क्या करे और क्या नहीं करे, वह किस मार्ग पर चले, उसका आचरण कैसा हो, वह कैसे अपने भौतिक और आध्यात्मिक उद्देश्य को प्राप्त करे - उसके लिये वेदों में तीन मार्ग हैं। इन तीन मार्गों को तीन काण्ड भी कहते है। दूसरे शब्दों में, सम्पूर्ण वैदि…