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रामनवमी क्यों मनाया जाता है?

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रामनवमी का त्यौहार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को मनाया जाता है। धर्मशास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान श्री राम जी का जन्म हुआ था। राम नवमी का त्यौहार भगवान विष्णु के अवतार भगवान राम के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। श्री राम का जन्म त्रेता युग में हुआ था, जिसका वर्णन आदिकाव्य वाल्मीकीय रामायण में उपलब्ध है:- ततो यज्ञे समाप्ते तु ऋतूनां षट्समत्ययु:।
ततश्च द्वादशे मासे चैत्रे नावमिके तिथौ॥
नक्षत्रेऽदितिदैवत्ये स्वोच्चसंस्थेषु पञ्चसु।
ग्रहेषु कर्कटे लग्ने वाक्पताविन्दुना सह॥
प्रोद्यमाने जगन्नाथं सर्वलोकनमस्कृतम्।
कौसल्याऽजनयद्रामं सर्वलक्षणसंयुतम्॥
- रामायण बालकाण्ड सर्ग १८ श्लोक ८ - १० अर्थात् :- यज्ञ समाप्ति के पश्चात जब छः ऋतुएँ बीत गयीं, तब बारहवें मासमें चैत्र के शुक्लपक्ष की नवमी तिथि में, पुनर्वसु नक्षत्र में एवं कर्क लग्न में, कौशल्यादेवी ने दिव्य लक्षणों से युक्त, सर्वलोकवन्दनीय जगदीश्वर श्री राम को जन्म दिया। उस समय पाँच ग्रह (सूर्य, मङ्गल, शनि, गुरु और शुक्र) अपने उच्च स्थान में थे, तथा लग्न में चन्द्रमा के साथ बृहस्पति विराजमान थे। रामनवमी कैसे मनाई जाती है? राम नवमी…

रामलला कैसे दिखते है? बाल्यावस्था में श्री राम कैसे थे?

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श्री राम का बाल रूप कैसा है? वो कैसे दीखते है? आप इस लेख में इस विषय के बारे में प्रमाण द्वारा जानेंगे। जैसा की आपने कई कविताओं को पढ़ा होगा, जिनमें श्री कृष्ण के बचपन और रूप की बहुत प्रशंसा की है; और हो भी क्यों न, श्री कृष्ण है ही नटखट। लेकिन श्री राम के विषय में ऐसा नहीं है; क्योंकि वे मर्यादा पुरुषोत्तम है। मर्यादा में नटखट…

ब्रह्मसूत्र | वेदान्त सूत्र

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ब्रह्मसूत्र, भारतीय दर्शन के छः दर्शनों में से एक है। इसे वेदान्त सूत्र, उत्तर-मीमांसा सूत्र, शारीरिक सूत्र या शारीरिक भाष्य और वेदान्त दर्शन आदि के नाम से भी जाने जाते है। इस पर अनेक भाष्य भी लिखे गये हैं। इसके रचयिता बादरायण है, जो वेदव्यास के नाम से भी जाने जाते है। महर्षि वेदव्यासरचित ब्रह्मसूत्र बड़ा ही महत्वपूर्ण ग्रंथ है…

सनातन धर्म में तीन काण्ड

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सनातन धर्म (हिंदू धर्म या वैदिक धर्म) के धार्मिक ग्रंथ वेदों में, तीन मार्ग बताए गए हैं। मनुष्य क्या करे और क्या नहीं करे, वह किस मार्ग पर चले, उसका आचरण कैसा हो, वह कैसे अपने भौतिक और आध्यात्मिक उद्देश्य को प्राप्त करे - उसके लिये वेदों में तीन मार्ग हैं। इन तीन मार्गों को तीन काण्ड भी कहते है। दूसरे शब्दों में, सम्पूर्ण वैदि…

प्रस्थानत्रयी क्या है? ग्रंथों के नाम

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प्रस्थानत्रयी क्या है, इसका अर्थ तथा कौन से ग्रंथ प्रस्थानत्रयी के अन्तर्गत है और क्यों? इस लेख में, हम प्रस्थानत्रयी से सम्बंधित इन प्रश्नों पर विस्तार से जानेंगे। प्रस्थानत्रयी सनातन धर्म का वह भाग है जो किसी सिद्धांत को सिद्ध करता है। यदि किसी सिद्धांत को प्रस्थानत्रयी द्वारा सिद्ध नहीं किया जाता है, तो वह सिद्धांत मान्य नह…

आत्मा सर्वव्यापक है, यह गीता में कहा गया है?

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“आत्मा सर्वगत है अर्थात् सर्वव्यापक है। यह गीता कह रही है” - ऐसा कुछ लोग कहते हैं। वे लोग गीता के २ अध्याय के २४ श्लोक का प्रमाण देते है। गीता के २ अध्याय के २४ श्लोक में ‘आत्मा सर्वगत है’ ऐसा कहा भी गया है। और आत्मा सर्वव्यापक नहीं है, इसका उल्लेख “आत्मा शरीराकार या सर्वव्यापक नहीं है” लेख में तर्क तथा वेद-गीता के प्रमाणों द्…

क्या आत्मा ही परमात्मा (ब्रह्म, भगवान) है? - वेद, गीता अनुसार

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‘अहम् ब्रह्मास्मि’ - यह महावाक्य है। यह वेदों में वर्णित है जिसका अर्थ है कि आत्मा ब्रह्म है। लेकिन, क्या आत्मा वास्तव में ब्रह्म है? क्योंकि वेद, गीता, पुराण आदि कुछ और ही कहते है। इसके आलावा, कुछ लोग आत्मा को परमात्मा और भगवान भी कहते हैं। इसलिए, तर्क और वेद, गीता आदि के प्रमाणों से, यह समझने की कोशिश करेंगे कि क्या आत्मा वा…

महावाक्य क्या है? - वेदों के चार महावाक्य

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महावाक्य क्या है? इसे इतना महत्व क्यों दिया जाता है? वेदों के चार महावाक्य कौन से हैं? उन्हें महावाक्य का दर्जा क्यों दिया जाता है? इत्यादि, कई प्रश्न है महावाक्य पर। अतएव इन सभी प्रश्नों पर विस्तार से इस लेख में जानेंगे। महावाक्य क्या है? वेदों के वाक्य जिनमें बहुत गहन विचार समाये हुए हैं उन्हें महावाक्य कहा जाता है। ये वेदों…

आत्मा चेतन है, तो उसकी चेतना पूरे शरीर में कैसे व्याप्त है?

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आत्मा अणु आकार होने के बाद भी, उसकी चेतना पुरे शरीर में कैसे व्याप्त है? यह प्रश्न बड़ा गंभीर है। क्योंकि इतना छोटा होने के उपरांत, उसका प्रभाव मनुष्य और हाथी जैसे विशाल शरीर में कैसे है? ‘आत्मा अणु ही है, वह शरीराकार या सर्वव्यापक नहीं है’ - लेख में, वेद, वेदांत और गीता के द्वारा यह बताया गया है। तो, आत्मा के अनेकों स्वभाव है,…