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राम गीता: केवल एक बार राम ने प्रजा को उपदेश दिया था।

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हम राम गीता की सभी चौपाइयों को नहीं लिखेंगे आप ➺Wikipedia पर चले जाये आपको सभी चौपाइयों मिलजाएगी। रामचरितमानस उत्तरकाण्ड ४२"एक बार रघुनाथ बोलाए। गुर द्विज पुरबासी सब आए॥ बैठे गुर मुनि अरु द्विज सज्जन। बोले बचन भगत भव भंजन ॥1॥" भावार्थ:-एक बार श्री रघुनाथजी के बुलाए हुए गुरु वशिष्ठजी, ब्राह्मण और अन्य सब नगर निवासी सभा में आए। जब गुरु, मुनि, ब्राह्मण तथा अन्य सब सज्जन यथायोग्य बैठ गए, तब भक्तों के जन्म-मरण को मिटाने वाले श्री रामजी वचन बोले। राम बोले "हे नगर निवासियों! मेरी बात सुनिए। यह बात मैं हृदय में कुछ ममता लाकर नहीं कहता हूँ और न अनीति(अधर्म) की बात कहता हूँ और न इसमें कुछ प्रभुता ही है, इसलिए संकोच, भय छोड़कर, ध्यान देकर, मेरी बातों को सुन लो और यदि तुम्हें अच्छी लगे, तो उसके अनुसार करो! वही मेरा सेवक है और वही प्रियतम है, जो मेरी आज्ञा माने। हे भाई! यदि मैं कुछ गलत बात कहूँ तो बेखटके मुझे रोक देना।" मनुष्य शरीर की विशेषता। राम जी फिर बोले "बड़े भाग्य से यह मनुष्य शरीर मिला है। सब ग्रंथों ने यही कहा है कि यह शरीर देवताओं के शरीर से भी दुर्लभ है और यह मनु…

भगवान है या नहीं? क्या प्रमाण है भगवान के होने का?

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दुनिया में अनेक वादों का विवाद है। उनमें से एक है “क्या भगवान होते है? अगर हाँ तो क्या प्रमाण?" प्रायः कुछ लोग मानते है कि ईश्वर होते है और कुछ लोग कहते की नहीं होते हैं। नास्तिकों का कहना है कि "भगवान को हम लोगों ने बनाया है। जैसे गरीब के लिए अन्नदाता भगवान है, ऐसे ही जो लोग दुखी है उनको ऐसा लगता है की कोई इस दुःख क…

'राधा' नाम का अर्थ और 'राधा' नाम का महत्व - ब्रह्मवैवर्त पुराण अनुसार

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'राधा' नाम का अर्थ संस्कृत में राधा शब्द के अनेक अर्थ होते है। 'राध' धातु से 'राधा' शब्द बनता है। संस्कृत में जितने शब्द है वो धातु से बनते है। आराधना (उपासना) अर्थ में 'राध' धातु होती है उससे 'अ' प्रत्यय होकर दो अर्थ हो जाता है। पहला कर्म में 'अ' प्रत्यय होता है और दूसरा करण में…

श्री कृष्ण ने राधा से कैसे और कहाँ विवाह किया? - ब्रह्म वैवर्त पुराण अनुसार

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ब्रह्म वैवर्त पुराण अनुसार जब श्री महादेव जी ने माता पार्वती को राधा के जन्म के बाद, राधा जी के छाया का विवाह यशोदा के भाई रायाण के बारे में बताया। फिर कृष्ण के साथ श्री राधा का विवाह कैसे हुआ यह बताया। श्री कृष्ण का श्री राधा से विवाह कृष्णेन सह राधायाः पुण्ये वृन्दावने वने।
विवाहं कारयामास विधिना जगतां विधिः॥४३॥
- ब्रह्मवैवर्…

राधा जी का विवाह किससे हुआ? उनके पति का क्या नाम है? - ब्रह्म वैवर्त पुराण अनुसार

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ब्रह्म वैवर्त पुराण अनुसार जब माता पार्वती जी श्री महादेव जी से आग्रह किया की उन्हें श्री राधा महत्ता सुनाइये। तब श्री महादेव जी ने श्री राधा के जन्म, ध्यान, उत्तम नाम-माहात्म्य, उत्तम पूजा-विधान, अभीष्ट पूजा-पद्धति आदि के बारे में बताया। जब श्री महादेव जी ने श्री राधा के जन्म के बारे में बताया, उसी के बाद उन्होंने राधा जी का …

श्री राधा जी का जन्म कैसे हुआ? - ब्रह्म वैवर्त पुराण अनुसार

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श्री राधा जी के जन्म की कथा ब्रह्म वैवर्त पुराण में मिलती है। ब्रह्म वैवर्त पुराण अनुसार श्री राधा जी का जन्म (प्रादुर्भाव) प्रथम बार गोलोक में और द्वितीय बार व्रज में वृषभानु जी के घर में हुआ। यह ध्यान रहे की जन्म का अर्थ प्रादुर्भाव होता है अर्थात् प्रकट होना। हम (आत्मा) माँ के पेट में एक शरीर प्रकट होते है। और भगवान जो अदृश…

वासुदेव और देवकी के पूर्व जन्म की कथा। - भागवत पुराण

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श्री कृष्ण जन्म के वक्त पहले भगवान विष्णु के रूप में माता देवकी तथा वासुदेव जी के समक्ष प्रकट हुए। तब सर्वपर्थम वासुदेव जी ने भगवान की स्तुति की फिर माता देवकी ने भगवान की स्तुति की। स्तुति करने के बाद भगवान ने वासुदेव और देवकी के तीन पूर्व जन्मों के बारे में बताया जिसमे वो उनके पुत्र बने थे। वो तीन जन्म जिसमे भगवान वासुदेव और …

वामन अवतार की कथा

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वामन ॠषि कश्यप तथा उनकी पत्नी अदिति के पुत्र थे। श्री हरि जिस पर कृपा करें, वही महाशक्तिशाली है। उन्हीं की कृपा से देवताओं ने अमृत-पान किया। उन्हीं की कृपा से असुरों पर युद्ध में वे विजयी हुए। पराजित असुर मृत एवं आहतों को लेकर अस्ताचल चले गये। असुरेश बलि इन्द्र के वज्र से मृत हो चुके थे। आचार्य शुक्र ने अपनी संजीवनी विद्या से ब…

वामन अवतार

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वामन अवतार धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान विष्णु के दस अवतारों में से पाँचवें अवतार हैं तथा त्रेता युग के पहले अवतार थे, जो भाद्रपद में शुक्ल पक्ष की द्वादशी को अवतरित हुए। यह विष्णु के पहले ऐसे अवतार थे जो मानव रूप में प्रकट हुए - अलबत्ता बौने ब्राह्मण के रूप में। इनको दक्षिण भारत में उपेन्द्र के नाम से भी जाना जाता है। माता पि…