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भगवान श्री कृष्ण की मृत्यु कैसे हुई? - भागवत पुराण

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भगवान श्री कृष्ण की मृत्यु कैसे हुई? मृत्यु के बाद, क्या श्री कृष्ण ने अपना शरीर छोड़ दिया और किसी अन्य शरीर को धारण कर लिया? उनके शरीर का दाह संस्कार किसने किया? इन प्रश्नों का उत्तर इस लेख में विस्तार से दिया गया है। परन्तु, सर्वप्रथम यह समझिये कि ‘भगवान श्री कृष्ण की मृत्यु कैसे हुई’ वास्तव में यह प्रश्न पूछना गलत है। क्योंकि मृत्यु का अर्थ है समाप्ति। चुकी भगवान और आत्मा की मृत्यु नहीं होती। अतएव यह प्रश्न करना गलत हो गया कि ‘श्री कृष्ण की मृत्यु कैसे हुई’ लेकिन यह प्रश्न मन में जरूर उठता है कि भगवान कृष्ण यह संसार से कैसे अलक्षित (आँखों से ओझल) हो गए या भगवान श्री कृष्ण ने भारतवर्ष छोड़ कर आपने लोक कैसे गये या भगवान कृष्ण ने प्रस्थान कैसे किया? तो इस बारे में भागवत पुराण के ११ वे स्कन्ध में विस्तार पूर्वक वर्णित है। भगवान श्री कृष्ण की मृत्यु लीला भूभारराजपृतना यदुभिर्निरस्य
गुप्तैः स्वबाहुभिरचिन्तयदप्रमेयः।
मन्येऽवनेर्ननु गतोऽप्यगतं हि भारं
यद्यादवं कुलमहो अविषह्यमास्ते॥३॥
नैवान्यतः परिभवोऽस्य भवेत्कथञ्चिन्
मत्संश्रयस्य विभवोन्नहनस्य नित्यम्।
अन्तः कलिं यदुकुलस्य विधाय वेणु
स्तम…

भगवान कृष्ण के शरीर का रंग काला है या नीला?

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भगवान श्री कृष्ण के शरीर का रंग जो है, वही श्री राम और श्री विष्णु का भी हैं। ग्रंथों में भगवान के तीनों रूपों के रंग अलग-अलग है, ऐसा नहीं कहा गया। अतः विश्व में कई मंदिर हैं जहां श्री कृष्ण, श्री राम और श्री विष्णु की मूर्ति या तो काले या नीले रंग की है। और नीले और काले रंग में भी बहुत अंतर है। कुछ स्थानों पर हल्के नीले-काले र…

वर्ण व्यवस्था क्या है? - गीता अनुसार

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वर्ण व्यवस्था क्या है? इस बारे में लोगों में बहुत भ्रांति है। कुछ लोग वेद, रामायण, गीता और मनुस्मृति का नाम लेते हैं, और कहते हैं कि वर्ण व्यवस्था समाज को बाटने तथा छोटे वर्ण वालों पर अत्याचार का साधन है तथा यह सनातन धर्म की कुप्रथा है इत्यादि। लेकिन, जो लोग ऐसी बातें करते हैं, उन्होंने इन ग्रंथों का स्वाध्याय सही ढंग से नहीं …

रामनवमी क्यों मनाया जाता है?

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रामनवमी का त्यौहार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को मनाया जाता है। धर्मशास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान श्री राम जी का जन्म हुआ था। राम नवमी का त्यौहार भगवान विष्णु के अवतार भगवान राम के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। श्री राम का जन्म त्रेता युग में हुआ था, जिसका वर्णन आदिकाव्य वाल्मीकीय रामायण में उपलब्ध है:- ततो यज्ञे…

संचित कर्म, प्रारब्ध कर्म और क्रियमाण कर्म क्या है?

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कर्म क्या है? - यह हमने पहले ही अपने लेख में बता दिया है कि मूल रूप से ‘कर्म’ को ‘क्रिया’ कहते है। यानी शरीर, वाणी और मन से की गयी क्रिया कर्म है। एवं इसी ‘क्रिया’ रूपी ‘कर्म’ को ध्यान में रखते हुए शास्त्र, वेद, गीता, पुराण आदि ने कर्म-अकर्म, शुभ-अशुभ कर्म, कर्मयोग, कर्म-बंधन आदि की व्याख्या की है। उदाहरण के लिए कर्म-बंधन प्रकर…

कर्म, अकर्म और विकर्म सिद्धांत क्या है?

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इस संसार में जितने भी मनुष्य है - चाहे वो संत हो या आम लोग हो, सभी कर्म करते है। लेकिन, कुछ लोगों को कर्म करते हुए भी उसका फल उनको नहीं मिलता और कुछ लोगों को कर्मों का फल भोगना पड़ता है। इस सिद्धांत को कर्म-अकर्म सिद्धांत कहते है। इस सिद्धांत को समझने से पहले यह समझ ले की कर्म क्या है? - यह हमने पहले ही अपने लेख में बता दिया है…

ब्रह्म, परमात्मा और भगवान कौन है? - वेद, पुराण, गीता अनुसार

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वेद में वेदांत में और कई ग्रंथों में ब्रह्म, परमात्मा और भगवान शब्दों का प्रयोग किया गया है। तो प्रश्न ये उठता है कि ये तीन अलग-अलग है या ये तीनो एक है। प्रायः कई लोग ये मानते है की हिन्दू धर्म एक भगवान को नहीं मानते है उनके यहाँ भगवानों का भंडार है। और अब तो ब्रह्म, परमात्मा और भगवान भी आ गए है। तो हम इन प्रश्नो के उत्तर को व…

भक्ति केवल भगवान की करनी चाहियें, देवताओं की नहीं। - वेद, पुराण अनुसार

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आज कल कुछ लोग भगवान की भी भक्ति करते है और साथ ही साथ देवताओं की भी करते है। जो भक्त भगवान सम्बन्धी फल चाहते है उन्हें तो ऐसा बिलकुल भी नहीं करना चाहिए। भक्ति केवल भगवान की ही करनी चाहिए, देवताओं की नहीं ऐसा क्यों? इस सिद्धांत को हम आप को वेद पुराणों गीता आदि के प्रमाणों से सिद्ध करेंगे। सर्वप्रथम यह समझ लीजिये कि स्वर्ग के दे…