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नवरात्रि | नवरात्र

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नवरात्र एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ होता है 'नौ रातें'। इन नौ रातों और दस दिनों के दौरान, शक्ति/देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है। माता भगवती की आराधना का श्रेष्ठ समय नवरात्र होता है। नवरात्र वर्ष में चार बार आता है। वर्ष के चार नवरात्रों में चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ की शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक नौ दिन के होते हैं, परंतु प्रसिद्धि में चैत्र और आश्विन के नवरात्र ही मुख्य माने जाते हैं। इनमें भी देवीभक्त आश्विन के नवरात्र अधिक करते हैं। इनको यथाक्रम वासन्ती और शारदीय नवरात्र भी कहते हैं। शारदीय नवरात्र में ही जगह-जगह गरबों की धूम रहती है। इनका आरम्भ चैत्र और आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से होता है। नवरात्र के नौ रातों में तीन देवियों - महालक्ष्मी, सरस्वती और दुर्गा के नौ स्वरुपों की पूजा होती है जिन्हें नवदुर्गा कहते हैं। चैत्र और अश्विन माह के नवरात्रों के अलावा भी वर्ष में दो बार गुप्त नवरात्रे आते हैं। पहला गुप्त नवरात्रा आषाढ शुक्ल पक्ष व दूसरा गुप्त नवरात्रा माघ शुक्ल पक्ष में आता है। आषाढ़ और माघ मास में आने वाले इन नवरात्रों को गुप्त विधाओं की प्राप्ति के लिये प्रयोग कि…

माया से मुक्ति कैसे मिले? - मोक्ष प्राप्ति सिद्धांत

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माया से मुक्ति कैसे मिले? कैसे सभी बन्धनों से मुक्ति मिले? क्या मोक्ष, आनन्द सदा के लिए मिल जाता है? इसको दूसरे शब्दों में ऐसा कह सकते है कि मोक्ष प्राप्ति की बाधाओं का अंत कैसे हो? कैसे मनुष्य त्रिकर्म, त्रिदोष, पंचकोश, काल आदि के बन्धनों से मुक्त हो? अतः इस लेख में इन विषयों पर विस्तार से जानेंगे। कर्म समाप्त मोक्ष प्राप्ति?…

मोक्ष क्या है? - वेद

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मोक्ष क्या है, क्या मुक्ति और मोक्ष दोनों एक है या इनमें कोई अंतर है, मोक्ष की आवश्यकता क्यों है, क्यों हम मोक्ष को प्राप्त करे, क्या माया से मुक्ति ‘मोक्ष’ है या कर्म बन्धन से मुक्ति ‘मोक्ष’ है? - यह एक ऐसा विषय है जिसके बारे में लोग विस्तार से नहीं जानते हैं। इसलिए, सरल शब्दों और प्रमाणों के द्वारा विस्तार से जानेंगे। मोक्ष …

दर्शन क्या है?

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दर्शन क्या है, इसका अर्थ, यह ‘Philosophy’ से कैसे भिन्न है, हमारे जीवन में इसका क्या महत्व है, एक दार्शनिक होना क्या होता है? हम इन सभी विषयों पर विस्तार से चर्चा करेंगे। 'Philosophy’ शब्द का अर्थ प्रायः लोग ‘Philosophy’ को ‘दर्शन’ समझते है। किन्तु, यह सत्य नहीं है। ‘Philosophy’ ग्रीक के शब्द ‘Philo और Sophia’ से बना है। ज…

नवधा भक्ति क्या है? - रामचरितमानस

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व्यक्ति अपने जीवन में कई प्रकार की भक्ति करता है। उनमें से, ईश्वर भक्ति के अंतर्गत नवधा भक्ति आती है। ‘नवधा’ का अर्थ है ‘नौ प्रकार से या नौ भेद’। अतः ‘नवधा भक्ति’ यानी ‘नौ प्रकार से भक्ति’। इस भक्ति का विधिवत पालन करने से भक्त भगवान को प्राप्त कर सकता है। जिन भक्तों ने भगवान को प्राप्त नहीं किया है और जिन्होंने प्राप्त किया है…

नवधा भक्ति क्या है? - भागवत पुराण

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व्यक्ति अपने जीवन में कई प्रकार की भक्ति करता है। जैसे देश भक्ति, मातृ (माता)-पितृ भक्ति, देव भक्ति, गुरु भक्ति, ईश्वर भक्ति इत्यादि। इनमें से, ईश्वर भक्ति के अंतर्गत नवधा भक्ति आती है। ‘नवधा’ का अर्थ है ‘नौ प्रकार से या नौ भेद’। अतः ‘नवधा भक्ति’ यानी ‘नौ प्रकार से भक्ति’। इस भक्ति का विधिवत पालन करने से भक्त भगवान को प्राप्त …

भक्ति की परिभाषा क्या है? - नारद भक्ति सूत्र

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हमने अपने लेख में अब तक आपको बताया कि मूल रूप से भक्ति क्या है? अब भगवान को केंद्र में रखते हुए, यह जानने की कोशिश करेंगे कि भक्ति क्या है, भक्ति की परिभाषा क्या है? यानी यह लेख ईश्वर भक्ति या कहें भगवान की भक्ति के बारे में है। ध्यान दे, ईश्वर भक्ति बहुत बड़ा विषय है, अतः संछेप में बताना कठिन है। वैसे तो, ईश्वर भक्ति मार्ग के …

भक्ति क्या है? भक्ति की परिभाषा?

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वेद, शास्त्र, पुराण, गीता आदि ग्रंथों में अनेकों प्रकार की भक्ति का वर्णन है - जैसे नवधा भक्ति, प्रेमा भक्ति, साधन भक्ति, देश भक्ति, मातृ (माता) भक्ति, पितृ भक्ति, गुरु भक्ति, देव भक्ति इत्यादि। लेकिन ये भक्ति देश, मातृ, पितृ, गुरु, देवता आदि के संदर्भ में परिभाषित हैं। किन्तु, प्रश्न यह है कि मूल रूप से भक्ति क्या है, भक्ति क…

भगवान कृष्ण के शरीर का रंग काला है या नीला?

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भगवान श्री कृष्ण के शरीर का रंग जो है, वही श्री राम और श्री विष्णु का भी हैं। ग्रंथों में भगवान के तीनों रूपों के रंग अलग-अलग है, ऐसा नहीं कहा गया। अतः विश्व में कई मंदिर हैं जहां श्री कृष्ण, श्री राम और श्री विष्णु की मूर्ति या तो काले या नीले रंग की है। और नीले और काले रंग में भी बहुत अंतर है। कुछ स्थानों पर हल्के नीले-काले र…