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क्या वेद अपौरुषेय है, या मानव निर्मित है? - वेद, पुराण अनुसार

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क्या वेद पौरुषेय (मानव निर्मित) है या अपौरुषेय (किसी ने नहीं बनाया है) या ईश्वर प्रणीत (भगवान ने बनाया) है? इन घम्भीर प्रश्नों का उत्तर हम आपको वेद तथा पुराण अनुसार देने जा रहे है। क्या वेद मानव निर्मित (पौरुषेय) है? वेद मानव निर्मित नहीं हो सकता। क्योंकि वेद में जो ज्ञान है, वो मानव अपनी बुद्धि से न तो समझ सकता है और न ही वैसे कल्पना करके लिख सकता है। अगर यह मान भी ले की वेद मानव निर्मित है। तो वेद में विरोधी बाते होती और वेदों का सिधांत एक मत नहीं होता। क्यों? इसलिए क्योंकि मनुष्य की बुद्धि बहुत कमजोर है और वेद में १ लाख वेद मन्त्र है। इतने मन्त्र को मन की कल्पना अनुसार लिखना, फिर उनके सिधांत में भी भेद न हो, उनमें कोई त्रुटी न हो, ब्रह्माण्ड, सूर्य, चन्द्र, मंगल आदि ग्रह की कल्पना करना तथा यह कहना कि अनंत प्रकार के ब्रह्माण्ड होते है, यह संभव नहीं हो सकता। अतएव वेद मानव निर्मित नहीं है। क्या वेद अपौरुषेय? अरेऽस्य महतो भूतस्य निश्वसितमेतद्यदृग्वेदो यजुर्वेदः सामवेदोऽथर्वाङ्गिरस इतिहासः पुराणं विद्या उपनिषदः श्लोकाः सूत्राण्यनुव्याख्यानानि व्याख्यानन्यस्यैवैतानि सर्वाणि निश्वसितानि॥

भक्ति केवल भगवान की करनी चाहियें, देवताओं की नहीं। - वेद, पुराण अनुसार

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आज कल कुछ लोग भगवान की भी भक्ति करते है और साथ ही साथ देवताओं की भी करते है। जो भक्त भगवान सम्बन्धी फल चाहते है उन्हें तो ऐसा बिलकुल भी नहीं करना चाहिए। भक्ति केवल भगवान की ही करनी चाहिए, देवताओं की नहीं ऐसा क्यों? इस सिद्धांत को हम आप को वेद पुराणों गीता आदि के प्रमाणों से सिद्ध करेंगे। सर्वप्रथम यह समझ लीजिये कि स्वर्ग के दे…

गोवर्धन पूजा क्यों की जाती है? - कृष्ण गोवर्धन लीला

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हिन्दुओं के प्रसिद्ध त्योहार दीपावली के अगले दिन, कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को गोवर्धन पूजन, गौ-पूजन के साथ-साथ अन्नकूट पर्व भी मनाया जाता है। इस दिन प्रात: ही नहा धोकर, स्वच्छ वस्त्र धारण कर अपने इष्ट का ध्यान किया जाता है। इष्ट उसे कहा जाता है जिससे हमारी जीविका चलती है। वेदों शास्त्रों के अनुसार संसार और समस्त प्राणी का प…

इन्द्र का क्षमा मांगना और श्री कृष्ण का अभिषेक - कृष्ण गोवर्धन लीला - भागवत पुराण

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हमने अब तक अपने तीन लेख में १. इन्द्र यज्ञ नहीं करने का कारण - कृष्ण की गोवर्धन लीला - भागवत पुराण २. गोवर्धन यज्ञ करने का कारण - कृष्ण की गोवर्धन लीला - भागवत पुराण और ३. श्रीकृष्ण का गोवर्धन धारण करना - कृष्ण की गोवर्धन लीला - भागवत पुराण लेख में विस्तार से सब कुछ बताया की कैसे श्रीकृष्ण ने इन्द्र तथा देवताओं की पूजा नहीं कर…

श्रीकृष्ण का गोवर्धन धारण करना। कृष्ण गोवर्धन लीला - भागवत पुराण

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हमने अब तक अपने दो लेख में १. इन्द्र यज्ञ नहीं करने का कारण? कृष्ण गोवर्धन लीला - भागवत पुराण और २. गोवर्धन यज्ञ करने का कारण? कृष्ण गोवर्धन लीला - भागवत पुराण लेख में विस्तार से सब कुछ बताया की कैसे श्रीकृष्ण ने इन्द्र तथा देवताओं की पूजा नहीं करने को कहा। अस्तु, तो अब आगे की लीला कुछ इस प्रकार है- श्रीशुक उवाच-
इन्द्रस्तदात्…

गोवर्धन पूजा करने का कारण? कृष्ण गोवर्धन लीला - भागवत पुराण

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हमने अब तक कृष्ण की इन्द्र यज्ञ नहीं करने का कारण? कृष्ण गोवर्धन लीला - भागवत पुराण अनुसार लेख में विस्तार से सब कुछ बताया की कैसे श्रीकृष्ण ने इन्द्र तथा देवताओं की पूजा नहीं करने को कहा। अस्तु, तो अब आगे श्री कृष्ण कहते है पिताजी से - गोवर्धन पूजा करने की विधि - श्री कृष्ण अनुसार न नः पुरोजनपदा न ग्रामा न गृहा वयम्।
वनौकसस्त…

इन्द्र यज्ञ नहीं करने का कारण? कृष्ण गोवर्धन लीला - भागवत पुराण

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श्रीमद्भागवत महापुराण में श्रीकृष्ण की गोवर्धन लीला का उल्लेख विस्तार से मिलता है। वो लीला कुछ इस प्रकार है- श्रीशुक उवाच -
भगवानपि तत्रैव बलदेवेन संयुतः।
अपश्यन्निवसन्गोपानिन्द्रयागकृतोद्यमान्॥१॥
तदभिज्ञोऽपि भगवान्सर्वात्मा सर्वदर्शनः।
प्रश्रयावनतोऽपृच्छद्वृद्धान्नन्दपुरोगमान्॥२॥
कथ्यतां मे पितः कोऽयं सम्भ्रमो व उपागतः।
किं फ…

क्या हम दीपावली मना रहे है?

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दीपावली अर्थात दीप मतलब दिया और वली मतलब पंक्तियां। दीपावली का अर्थ है - दीपों की पंक्तियां क्या हम दीपावली मना रहे है? आज यह प्रश्न करना जरुरी है। हम लोग दीपावली से पहले रूम को साफ करते है। दीपावली के दिन हम लोग लक्ष्मी गणेश की पूजा करते हैं। उसके बाद कुछ लोग अपने रिस्तेदारो के घर मिठाई लेके जाते हैं, बड़ो से आशीर्वाद लेते हैं।…

राम का अयोध्या आगमन - वाल्मीकि रामायण अनुसार

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श्रीराम का अयोध्या आगमन से पूर्व, उनके आदेश अनुसार हनुमानजी ने निषादराज गुह तथा भरतजी को राम आगमन की सुचना दी। विस्तार से पढ़े राम अयोध्या आगमन से पूर्व भरत हनुमान मिलन। - वाल्मीकि रामायण अनुसार उसके उपरांत जो हुआ वो इस प्रकार है - अयोध्या में श्रीराम के स्वागत की तैयारी श्रुत्वा तु परमानन्दं भरतः सत्यविक्रमः।
हृष्टमाज्ञापयामास…