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भगवान श्री राम जी का जन्म कैसे हुआ? रामचरितमानस अनुसार राम जन्म कथा

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भगवान राम ने कैसे अवतार लिया अथवा कैसे जन्म लिया? कुछ लोग ऐसा सोचते है कि भगवान श्री रामचंद्र हमारे जैसे माँ के पेट से पैदा हुए और हमारे जैसे मानव (मनुष्य) थे। परन्तु वास्तविकता यह नहीं है। जन्म शब्द बनता है जनि धातु से, और जनि का अर्थ है प्रादुर्भाव। प्रादुर्भाव माने प्रकट होना या दोबारा नये सिरे से अस्तित्व में आना। जैसे हम आत्मा माँ के पेट में प्रकट होते है उसी को हम जन्म कहते है। आत्मा किसी दिन नहीं बनती है। आत्मा नित्य है। अस्तु! हम (आत्मा) माँ के पेट में प्रकट होते है। तो प्रकट होने को जन्म लेना कहते है। भगवान श्री राम ने जन्म कैसे लिया? भगवान श्री राम ने जन्म कैसे लिया इस बारे में तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में बहुत ही सुन्दर निरूपण किया है, हम वही राम जन्म की कथा को आपको बतायेगें। तुलसीदास जी श्रीरामचरितमानस बालकाण्ड में लिखते है- भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी।
हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी॥
लोचन अभिरामा तनु घनस्यामा निज आयुध भुजचारी।
भूषन बनमाला नयन बिसाला सोभासिंधु खरारी॥1॥ भावार्थ:- दीनों पर दया करने वाले, कौसल्याजी के हितकारी कृपालु प्रभु प्रकट ह…

रामनवमी क्यों मनाया जाता है?

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रामनवमी का त्यौहार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को मनाया जाता है। धर्मशास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान श्री राम जी का जन्म हुआ था। राम नवमी का त्यौहार भगवान विष्णु के अवतार भगवान राम के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। श्री राम का जन्म त्रेता युग में हुआ था, जिसका वर्णन आदिकाव्य वाल्मीकीय रामायण में उपलब्ध है:- ततो यज्ञे…

संचित कर्म, प्रारब्ध कर्म और क्रियमाण कर्म क्या है?

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कर्म क्या है? - यह हमने पहले ही अपने लेख में बता दिया है कि मूल रूप से ‘कर्म’ को ‘क्रिया’ कहते है। यानी शरीर, वाणी और मन से की गयी क्रिया कर्म है। एवं इसी ‘क्रिया’ रूपी ‘कर्म’ को ध्यान में रखते हुए शास्त्र, वेद, गीता, पुराण आदि ने कर्म-अकर्म, शुभ-अशुभ कर्म, कर्मयोग, कर्म-बंधन आदि की व्याख्या की है। उदाहरण के लिए कर्म-बंधन प्रकर…

कर्म, अकर्म और विकर्म सिद्धांत क्या है?

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इस संसार में जितने भी मनुष्य है - चाहे वो संत हो या आम लोग हो, सभी कर्म करते है। लेकिन, कुछ लोगों को कर्म करते हुए भी उसका फल उनको नहीं मिलता और कुछ लोगों को कर्मों का फल भोगना पड़ता है। इस सिद्धांत को कर्म-अकर्म सिद्धांत कहते है। इस सिद्धांत को समझने से पहले यह समझ ले की कर्म क्या है? - यह हमने पहले ही अपने लेख में बता दिया है…

ब्रह्म, परमात्मा और भगवान कौन है? - वेद, पुराण, गीता अनुसार

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वेद में वेदांत में और कई ग्रंथों में ब्रह्म, परमात्मा और भगवान शब्दों का प्रयोग किया गया है। तो प्रश्न ये उठता है कि ये तीन अलग-अलग है या ये तीनो एक है। प्रायः कई लोग ये मानते है की हिन्दू धर्म एक भगवान को नहीं मानते है उनके यहाँ भगवानों का भंडार है। और अब तो ब्रह्म, परमात्मा और भगवान भी आ गए है। तो हम इन प्रश्नो के उत्तर को व…

भगवान श्री कृष्ण की मृत्यु कैसे हुई? - भागवत पुराण

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भगवान श्री कृष्ण की मृत्यु कैसे हुई? मृत्यु के बाद, क्या श्री कृष्ण ने अपना शरीर छोड़ दिया और किसी अन्य शरीर को धारण कर लिया? उनके शरीर का दाह संस्कार किसने किया? इन प्रश्नों का उत्तर इस लेख में विस्तार से दिया गया है। परन्तु, सर्वप्रथम यह समझिये कि ‘भगवान श्री कृष्ण की मृत्यु कैसे हुई’ वास्तव में यह प्रश्न पूछना गलत है। क्यों…

भक्ति केवल भगवान की करनी चाहियें, देवताओं की नहीं। - वेद, पुराण अनुसार

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आज कल कुछ लोग भगवान की भी भक्ति करते है और साथ ही साथ देवताओं की भी करते है। जो भक्त भगवान सम्बन्धी फल चाहते है उन्हें तो ऐसा बिलकुल भी नहीं करना चाहिए। भक्ति केवल भगवान की ही करनी चाहिए, देवताओं की नहीं ऐसा क्यों? इस सिद्धांत को हम आप को वेद पुराणों गीता आदि के प्रमाणों से सिद्ध करेंगे। सर्वप्रथम यह समझ लीजिये कि स्वर्ग के दे…

गोवर्धन पूजा क्यों की जाती है? - कृष्ण गोवर्धन लीला

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हिन्दुओं के प्रसिद्ध त्योहार दीपावली के अगले दिन, कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को गोवर्धन पूजन, गौ-पूजन के साथ-साथ अन्नकूट पर्व भी मनाया जाता है। इस दिन प्रात: ही नहा धोकर, स्वच्छ वस्त्र धारण कर अपने इष्ट का ध्यान किया जाता है। इष्ट उसे कहा जाता है जिससे हमारी जीविका चलती है। वेदों शास्त्रों के अनुसार संसार और समस्त प्राणी का प…

इन्द्र का क्षमा मांगना और श्री कृष्ण का अभिषेक - कृष्ण गोवर्धन लीला - भागवत पुराण

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हमने अब तक अपने तीन लेख में १. इन्द्र यज्ञ नहीं करने का कारण - कृष्ण की गोवर्धन लीला - भागवत पुराण २. गोवर्धन यज्ञ करने का कारण - कृष्ण की गोवर्धन लीला - भागवत पुराण और ३. श्रीकृष्ण का गोवर्धन धारण करना - कृष्ण की गोवर्धन लीला - भागवत पुराण लेख में विस्तार से सब कुछ बताया की कैसे श्रीकृष्ण ने इन्द्र तथा देवताओं की पूजा नहीं कर…