जन्म का मतलब? क्या श्री कृष्ण, श्री राम का जन्म हुआ था?

जन्म श्री कृष्ण श्री राम का

जन्म कौन लेता है?

संसार में केवल मनुष्य नहीं! सभी जीव-जंतु भी जन्म लेते हैं। और "जो जन्म लेता है उसका नाश होता है " ये भी हम सुनते समझते हैं। गलत! जो जन्म लेता हैं उसका नाश नहीं होता। भगवनने जन्म लिया था न, श्री कृष्ण ने स्वयं कहाँ है गीता ४.५। श्री कृष्ण की हम लोग जन्माष्टमी मनाते हैं। तो श्री कृष्ण का फिर नाश भी होनी चाहिए। लेकिन अगर श्री कृष्ण का नाश होता तो फिर भगवान नहीं रहे। भगवान मनुष्य और जीव-जंतु सब जन्म लेते है। लेकिन जो हम लोग ये बोलते हैं की जो जन्म लेता है उसका नाश होता है! ये बात गलत है।
पहले ये समझ लेते है ये जन्म माने क्या होता हैं। जन्म शब्द बनता है जनि धातु से, और जनि का अर्थ है प्रादुर्भाव। प्रादुर्भाव माने प्रकट होना या दोबारा नये सिरे से अस्तित्व में आना। तो "भये प्रकट कृपाला दीनदयाल" - श्री राम। तो हम लोग भी भये प्रकट 'आकाश' हम भी है, आप भी हैं। क्योंकि हम आत्मा हैं। हम माँ के गर्भ में आये! बनाये नहीं गए। हम-लोग ७वे महीने प्रकट होते हैं। ७वे महीने के बाद बच्चा में चेतना आती हैं, क्योंकि आत्मा चेतन हैं। उससे पहले वो बच्चा चेतनत्व अवस्था में नहीं होता।
संस्कृत में नश धातु से नाश शब्द बनता है। और नाश शब्द का अर्थ होता है अदर्श ने माने अलक्षित हो जाना गायब हो जाना। तो हम लोग जन्म लेने और बाद में मर गए। मर गए तो क्या हुआ। हम लोग अलक्षित हो गए। "आज वो चला गया" शरीर छोड़ कर चला गया। तो हम लोग शरीर छोड़ के जाते है। हमारी मृत्यु नहीं होती। शरीर के मृत्यु होती है। हम-लोग अपने-आपको शरीर मानते है इस वह्जः से समझने में भूल हो गयी है। मृत्यु माने समाप्ति। लेकिन हमारी समाप्ति तो नहीं होती। हमलोग कर्म-फल भोगने के लिए फिर आते है, जाते है। शरीर का मृत्यु होता है हमारी आत्मा का नहीं।
तो हम सदा रहेगे। वो शरीर कोई मिले गीता २.२२ जैसे कपड़े बदलते रहते है। तो जन्म! हमारा भी है और श्री राम काभी है। भगवान जन्म(अवतार) क्यों लेते हैं? भगवान क्या करने आते हैं संसार में?