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ढोल गवाँर सूद्र पसु नारी। सकल ताड़ना के अधिकारी॥ का सही अर्थ क्या है? इस लेख को धैर्य पूर्वक पढ़े हम सभी शंकाओं का समाधान इस लेख में करने वाले है। अस्तु, गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस का पारायण हम बचपन से ही करते आ रहे हैं। लेकिन समय-समय पर इसके तमाम अंशो पर सवाल उठाये जाते रहते हैं। इसमें से एक चौपाई जिसका सबस…
भगवान है या नहीं? क्या प्रमाण है भगवान के होने का?
दुनिया में अनेक वादों का विवाद है। उनमें से एक है “क्या भगवान होते है? अगर हाँ तो क्या प्रमाण?" प्रायः कुछ लोग मानते है कि ईश्वर होते है और कुछ लोग कहते की नहीं होते हैं। नास्तिकों का कहना है कि "भगवान को हम लोगों ने बनाया है। जैसे गरीब के लिए अन्नदाता भगवान है, ऐसे ही जो लोग दुखी है उनको ऐसा लगता है की कोई इस दुःख को …
दर्शन क्या है?
दर्शन क्या है, इसका अर्थ, यह ‘Philosophy’ से कैसे भिन्न है, हमारे जीवन में इसका क्या महत्व है, एक दार्शनिक होना क्या होता है? हम इन सभी विषयों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
'Philosophy’ शब्द का अर्थ
प्रायः लोग ‘Philosophy’ को ‘दर्शन’ समझते है। किन्तु, यह सत्य नहीं है। ‘Philosophy’ ग्रीक के शब्द ‘Philo और Sophia’ से बना है। जिन…
संचित कर्म, प्रारब्ध कर्म और क्रियमाण कर्म क्या है?
कर्म क्या है? - यह हमने पहले ही अपने लेख में बता दिया है कि मूल रूप से ‘कर्म’ को ‘क्रिया’ कहते है। यानी शरीर, वाणी और मन से की गयी क्रिया कर्म है। एवं इसी ‘क्रिया’ रूपी ‘कर्म’ को ध्यान में रखते हुए शास्त्र, वेद, गीता, पुराण आदि ने कर्म-अकर्म, शुभ-अशुभ कर्म, कर्मयोग, कर्म-बंधन आदि की व्याख्या की है। उदाहरण के लिए कर्म-बंधन प्रकरण …