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क्या है वास्तविक वेदान्त का भाष्य? - वेदव्यास द्वारा

ब्रह्मसूत्र का भाष्य
हमारे हिन्दू धर्म में लगभग सभी जगतगुरुओं ने वेदांत पर भाष्य लिखा है और जितने भी ज्ञानी जान है उन्होंने भी वेदान्त पर भाष्य लिखा है। लेकिन वर्तमान काल के मूल जगतगुरु श्रीकृपालु जी महाराज और चैतन्य महाप्रभु ने कहा (चैतन्य चरितामृत मध्य २५.१४३-१४४) कि ये आश्चर्य की बात है जब वेदव्यास द्वारा रचित गरुण पुराण में, वेदव्यास ने लिखा की श्रीमद्भागवतपुराण वेदांत का भाष्य है। तो फिर इन लोगों ने क्यों भाष्य लिखा? ये आश्चर्य है।
गरुण पुराण १०.३९४-३९५ में वेदव्यास जी ने कहा है -
अर्थोऽयं ब्रह्मसूत्राणां, भारतार्थ विनिर्णयः।
गायत्रीभाष्यरूपोऽसौ वेदार्थ परिबृंहणः ॥
पुराणानां साररूपः साक्षाद् भगवतोदितः।
द्वादशस्कन्धसंयुक्तः शतविच्छेदसंयुतः ॥
ग्रन्थाऽष्टादशसाहस्रः श्रीमद्भागवताभिधः॥
भावार्थ :- यह श्रीमद्भागवत पुराण ब्रह्मसूत्र और समस्त उपनिषदों का तात्पर्य है तथा यह अष्टादश संज्ञक ग्रन्थ गायत्री का भाष्यस्वरूप है।
अतएव वेदव्यास जी कहते है कि हमने जो वेदान्त (ब्रह्मसूत्र) लिखा है उसका अर्थ हम जानते है। आप लोग बाद में कोई भाष्य मत लिखना। क्योंकि वास्तविक भाष्य हम जानते है और हम लिख दे रहे है - १८००० श्लोक में श्रीमद्भागवतपुराण।
यहाँ पर एक और विचार योग्य बात भी है। वेदव्यास जी ने समस्त पुराण, वेदांत और वेदों को विभाजन करने के बाद लिखा है श्रीमद्भागवतपुराण। सबसे पहले वेदव्यास जी ने १ लाख श्लोक का महाभारत फिर ७०० श्लोक की गीता लिखा फिर ५५५ सूत्रों का ब्रह्मसूत्र लिखा फिर १८ पुराण जिसमे से एक श्रीमद्भागवत पुराण लिखा।

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