हिन्दू वैदिक चार युग का कुल समय।

वैदिक चार युग का समय
युग, हिंदु सभ्यता के अनुसार, एक निर्धारित संख्या के वर्षों की कालावधि है। ब्रह्माण्ड का काल चक्र चार युगों के बाद दोहराता है। काल के अंगविशेष के रूप में 'युग' शब्द का प्रयोग ऋग्वेद से ही मिलता है (दश युगे, ऋग् 1.158.6) इस युग शब्द का परिमाण अस्पष्ट है।

युग का अर्थ

युग का अर्थ होता है एक निर्धारित संख्या के वर्षों की काल-अवधि। उदाहरणः कलियुग, द्वापर, सत्ययुग, त्रेतायुग।

युग का समय

सत्ययुग (उकृत), त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग। सबसे पहले सत्ययुग आता है, फिर त्रेतायुग, फिर द्वापरयुग और फिर कलियुग आता है।

चारों युग

सत युग - 1,728,000 मानव वर्ष
त्रेता युग - 1,296,000 मानव वर्ष
द्वापर युग - 864,000 मानव वर्ष
कलि युग - 432,000 मानव वर्ष
इस को दूसरे शब्दों में कहे तो
कलियुग का दोगुना द्वापर - 432,000x2=840000 मानव वर्ष
कलियुग का तीनगुना त्रेता - 432,000x3=1296000 मानव वर्ष
कलियुग का चारगुना सत युग - 432,000x4=1728000 मानव वर्ष
वैदिक चार युग का समय।
विष्णु पुराण के अनुसार - विष्णु पुराण भाग १, तॄतीय अध्याय के अनुसार: 1 मानव वर्ष = एक दिव्य दिवस (दिन)
360 मानव वर्ष = एक दिव्य वर्ष
4,000 + 400 + 400 = 4,800 दिव्य वर्ष = 1 सत युग
3,000 + 300 + 300 = 3,600 दिव्य वर्ष = 1 त्रेता युग
2,000 + 200 + 200 = 2,400 दिव्य वर्ष = 1 द्वापर युग
1,000 + 100 + 100 = 1,200 दिव्य वर्ष = 1 कलि युग
12,000 दिव्य वर्ष = 4 युग = 1 महायुग (दिव्य युग भी कहते हैं)
इसको अगर आप मानव वर्ष में बदलना चाहते है तो - 360 मानव वर्ष = एक दिव्य वर्ष होता है इसलिए:
1 कलि युग = 1,200x360 = 432,000 मानव वर्ष
1 द्वापर युग = 2,400x360 = 864,000 मानव वर्ष
1 त्रेता युग = 3,600x360 = 1,296,000 मानव वर्ष
1 सत युग = 4,800x360 = 1,728,000 मानव वर्ष

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