रामलला कैसे दिखते है? बाल्यावस्था में श्री राम कैसे थे?

श्री राम कैसे दिखते थे?

श्री राम का बाल रूप कैसा है? वो कैसे दीखते है? आप इस लेख में इस विषय के बारे में प्रमाण द्वारा जानेंगे। जैसा की आपने कई कविताओं को पढ़ा होगा, जिनमें श्री कृष्ण के बचपन और रूप की बहुत प्रशंसा की है; और हो भी क्यों न, श्री कृष्ण है ही नटखट। लेकिन श्री राम के विषय में ऐसा नहीं है; क्योंकि वे मर्यादा पुरुषोत्तम है। मर्यादा में नटखटपन नहीं हुआ करता। अतः जिनकी छवि मर्यादा पुरुषोत्तम की हो, तो उनके बाल्यावस्था का नटखटपन कविताओं में पिरोना कठिन कार्य है। यही कारण है की श्री राम के बाल्यावस्था का वर्णन वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड में अधिक नहीं है।

वाल्मीकि रामायण, रामचरितमानस एवं पुराणों अनुसार, श्री राम भगवान विष्णु के अवतार हैं। उनके जन्म की कथा भी विचित्र ही है। क्योंकि भगवान श्री राम का जन्म एक सामान्य मनुष्य की तरह माँ के पेट से नहीं हुआ था। उनका जन्म कैसे हुआ, इसे जानने के लिए पढ़ें - श्री राम का जन्म कैसे हुआ? तो श्री राम बचपन में यानी श्री राम का बाल स्वरूप कैसा है? रामलला बचपन में कैसे दीखते थे? इसके लिए हमने पहले वाल्मीकि रामायण में प्रमाण खोजने की कोशिश की। किन्तु, वाल्मीकि रामायण में हमें रामलला के रूप का वर्णन नहीं मिला। हो सकता है कि रामलला के रूप का वर्णन वाल्मीकि रामायण में वर्णन हो, लेकिन हमें इसका प्रमाण नहीं मिला, यदि आपको मिले तो हमें ईमेल करें। इसलिये, हमने अध्यात्म रामायण को पढ़ा, जिसमें श्री राम की बाल लीला और उनके बाल्यावस्था का वर्णन भी मिलता है।

इत्युक्त्वा मातरं रामो बालो भूत्वा रुरोद ह।
बालत्वेऽपीन्द्रनीलाभो विशालाक्षोऽतिसुन्दरः॥३५॥
- अध्यात्म रामायण बालकाण्ड सर्ग ३

अर्थात् :- माता से इस प्रकार कह भगवान बाल स्वरूप होकर रोने लगे। उनका बालरूप भी इंद्र नीलमणि के समान श्यामवर्ण बड़े-बड़े नेत्रों वाला और अति सुन्दर था।

भाले स्वर्णमयाश्वत्थपर्णमुक्ताफलप्रभम्।
कण्ठे रत्नमणिव्रातमध्यद्वीपिनखाञ्चितम्॥४४॥
- अध्यात्म रामायण बालकाण्ड सर्ग ३

अर्थात् :- जिसके ललाट पर मोतियों से सजाया हुआ देदीप्यमान (बड़ा चमकीला) सुवर्णमय अश्वत्थपत्र (पीपल का पत्ता) तथा गले में रत्न और मणि समूह के साथ बीच-बीच में व्याघ्र के नाखून सजाकर गुँथी हुई लड़ियाँ सुशोभित हैं।

यानि, श्री राम के माथे पर बड़ा चमकीला एक पीपल के पत्ते जैसा मुकुट है जो सोने के समान रंग का है। उनके गले में रत्न है और उन रत्नों के बीच-बीच में व्याघ्र के नाखून सजाकर गुँथी हुई लड़ियाँ है।

कर्णयोः स्वर्णसम्पन्नरत्नार्जुनसटालुकम्।
शिञ्जानमणिमञ्जीरकटिसूत्राङ्गदैर्वृतम्॥४५॥
- अध्यात्म रामायण बालकाण्ड सर्ग ३

अर्थात् :- कानों में अर्जुन वृक्ष के कच्चे फलों के समान रत्नजड़ित सुवर्ण के आभूषण लटक रहे हैं, तथा जो झनकाते हुए मणिमय नूपुर (पायल), सुवर्णमेखला और बाजूबंद से विभूषित हैं।

यानि, श्री राम के कान का कुंडल सोने का है, जो अर्जुन वृक्ष के कच्चे फलों के आकार का है, जिसमें रत्न हैं। उनके पैरों में झनकाते हुए मणिमय पायल है, स्वर्ण का कमरबंद और बाजूबंद है।

स्मितवक्त्राल्पदशनमिन्द्रनीलमणिप्रभम्।
अङ्गणे रिङ्गमाणं तं तर्णकाननु सर्वतः।
दृष्ट्वा दशरथो राजा कौसल्या मुमुदे तदा॥४६॥
- अध्यात्म रामायण बालकाण्ड सर्ग ३

अर्थात् :- उस इन्द्र नीलमणि की सी आभा वाले तथा स्वल्प दाँतों से युक्त मुसकाते हुए मुख वाले बालक (राम) को राजा भवन के आँगन में बछड़े के पीछे-पीछे सब ओर बाल गति से दौड़ते देख महाराज दशरथ और माता कौसल्या अति आनन्दित होते थे।

यानि, श्री राम का रूप इन्द्र नीलमणि की तरह श्यामवर्ण है, बाल्य अवस्था में उनके मुख पर मुस्कान है और उनके दाँत बहुत छोटे-छोटे हैं।

तो, श्री राम के शरीर का रंग श्यामवर्ण है, यानि श्याम रंग का है। अब ये श्याम रंग कैसा दीखता है? इस विषय में जानने के लिए आप भगवान कृष्ण के शरीर का रंग काला है या नीला? इस लेख को पढ़े।

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