भगवान कल्कि अवतार कथा - भागवत पुराण

कल्कि अवतार भविष्यवाणी

कलयुग के भगवान कौन है?

भगवान प्रत्येक युग में अवतार लेते है। उन्हें युगावतार कहते है। जैसे राम कृष्ण ये युगावतार है। ऐसे ही श्रीमद्भागवत महापुराण द्वादश स्कन्ध अध्याय २ में पहले श्रीशुकदेवजी घोर कलियुग के लक्षण का वर्णन करते है, फिर यह प्रमाण मिलता है कि कलयुग के भगवान कल्कि होंगे।

कल्कि अवतार की कथा और भविष्यवाणी

इत्थं कलौ गतप्राये जनेतु खरधर्मिणि ।
धर्मत्राणाय सत्त्वेन भगवान् अवतरिष्यति ॥ १६ ॥
चराचर गुरोर्विष्णोः ईश्वरस्याखिलात्मनः ।
धर्मत्राणाय साधूनां जन्म कर्मापनुत्तये ॥ १७ ॥
- भागवत पुराण १२.२.१६-१७

भावार्थः - परीक्षित! अधिक क्या कहें-कलियुग का अन्त होते-होते मनुष्यों का स्वभाव गधों-जैसा दुःसह बन जायेगा, लोग प्रायः गृहस्थी का भार ढोने वाले और विषयी हो जायेंगे। ऐसी स्थिति में धर्म की रक्षा करने के लिये सत्त्वगुण स्वीकार करके स्वयं भगवान अवतार ग्रहण करेंगे। प्रिय परीक्षित! सर्वव्यापक भगवान विष्णु सर्वशक्तिमान् हैं। वे सर्वस्वरूप होने पर भी चराचर जगत् के शिक्षक-सद्गुरु हैं। वे साधु-सज्जन पुरुषों के धर्म की रक्षा के लिये, उनके कर्म का बन्धन काटकर उन्हें जन्म-मृत्यु के चक्र से छुड़ाने के लिये अवतार ग्रहण करते हैं।

कल्कि अवतार के पिता और जगह का नाम

संभलग्राम मुख्यस्य ब्राह्मणस्य महात्मनः ।
भवने विष्णुयशसः कल्किः प्रादुर्भविष्यति ॥ १८ ॥
अश्वं आशुगमारुह्य देवदत्तं जगत्पतिः ।
असिनासाधुदमनं अष्टैश्वर्य गुणान्वितः ॥ १९ ॥
विचरन् आशुना क्षौण्यां हयेनाप्रतिमद्युतिः ।
नृपलिङ्‌गच्छदो दस्यून् कोटिशो निहनिष्यति ॥ २० ॥
- भागवत पुराण १२.२.१८-२०

भावार्थः - उन दिनों शम्भल-ग्राम में विष्णुयश नाम के श्रेष्ठ ब्राह्मण होंगे। उनका हृदय बड़ा उदार एवं भगवद्भक्ति से पूर्ण होगा। उन्हीं के घर कल्कि भगवान अवतार ग्रहण करेंगे। श्रीभगवान ही अष्टसिद्धियों के और समस्त सद्गुणों के एकमात्र आश्रय हैं। समस्त चराचर जगत् के वे ही रक्षक और स्वामी हैं। वे देवदत्त नामक शीघ्रगामी घोड़े पर सवार होकर दुष्टों को तलवार के घाट उतार कर ठीक करेंगे। उनके रोम-रोम से अतुलनीय तेज की किरणें छिटकती होंगी। वे अपने शीघ्रगामी घोड़े से पृथ्वी पर सर्वत्र विचरण करेंगे और राजा के वेष में छिपकर रहने वाले कोटि-कोटि डाकुओं का संहार करेंगे।

अथ तेषां भविष्यन्ति मनांसि विशदानि वै ।
वासुदेवाङ्‌गरागाति पुण्यगंधानिलस्पृशाम् ।
पौरजानपदानां वै हतेष्वखिलदस्युषु ॥ २१ ॥
तेषां प्रजाविसर्गश्च स्थविष्ठः संभविष्यति ।
वासुदेवे भगवति सत्त्वमूर्तौ हृदि स्थिते ॥ २२ ॥
- भागवत पुराण १२.२.२१-२२

भावार्थः - प्रिय परीक्षित! जब सब डाकुओं का संहार हो चुकेगा, तब नगर की और देश की सारी प्रजा का हृदय पवित्रता से भर जायेगा; क्योंकि भगवान कल्कि के शरीर में लगे हुए अंगरांग का स्पर्श पाकर अत्यन्त पवित्र हुई वायु उनका स्पर्श करेगी और इस प्रकार वे भगवान के श्रीविग्रह की दिव्य गन्ध प्राप्त कर सकेंगे। उनके पवित्र हृदय में सत्त्वमूर्ति भगवान वासुदेव विराजमान होंगे और फिर उनकी सन्तान पहले की भाँति हष्ट-पुष्ट और बलवान् होने लगेगी।

कल्कि अवतार के बाद सतयुग का प्रारंभ

यदावतीर्णो भगवान् कल्किर्धर्मपतिर्हरिः ।
कृतं भविष्यति तदा प्रजासूतिश्च सात्त्विकी ॥ २३ ॥
यदा चन्द्रश्च सूर्यश्च तथा तिष्यबृहस्पती ।
एकराशौ समेष्यन्ति भविष्यति तदा कृतम् ॥ २४ ॥
- भागवत पुराण १२.२.२३-२४

भावार्थः - प्रजा के नयन-मनोहारी हरि ही धर्म के रक्षक और स्वामी हैं। वे ही भगवान जब कल्कि के रूप में अवतार ग्रहण करेंगे, उसी समय सत्ययुग का प्रारम्भ हो जायेगा और प्रजा की सन्तान-परम्परा स्वयं ही सत्त्वगुण से युक्त हो जायेगी। जिस समय चन्द्रमा, सूर्य और बृहस्पति एक ही समय एक ही साथ पुष्य नक्षत्र के प्रथम पल में प्रवेश करके एक राशि पर आते हैं, उसी समय सत्ययुग का प्रारम्भ होता है।

कल्कि अवतार की तारीख

भगवान कल्कि का अवतार भागवत पुराण अनुसार कलियुग के अंत में होगा। यह कलियुग वेद-पुराणों अनुसार ४,३२,००० (चार लाख बतीस हजार) वर्ष का है। अभी लगभग 5100 वर्ष बीत गये है। इसलिए 4,32,000-5100 वर्ष तो कुछ बचे 4,26,900 वर्ष। अतएव आज से 4,26,900 वर्ष के लगभग भगवान कल्कि का अवतार होगा। कल्कि अवतार की तारीख का साल सन 4,32,000 वर्ष के लगभग होगा।

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